Hallmark Gold Kya Hai Hindi
हॉलमार्क सोना क्या है? BIS हॉलमार्किंग का पूरा मतलब
हॉलमार्क सोना क्या है? BIS हॉलमार्किंग का पूरा मतलब
Buying Guide

हॉलमार्क सोना क्या है? BIS हॉलमार्किंग का पूरा मतलब

By Bhargav14 Oct 202613 min read

हॉलमार्क सोना वह गहना है जिसकी शुद्धता BIS से मान्यता प्राप्त केंद्र ने जांची हो। जानें निशान का मतलब, 916 का अर्थ और खरीदने से पहले HUID कैसे जांचें।

सुनार की दुकान में 22 कैरेट और 18 कैरेट की दो चेन पास-पास रखी हों, तो आम आदमी की आंख को दोनों लगभग एक जैसी दिखती हैं। मिश्रधातु बदलने से सोने का रंग बदल जाता है, इसलिए कम शुद्धता वाला सोना भी चमकदार और भरा-भरा दिख सकता है। तराजू वजन बता देता है, शुद्धता नहीं। दशकों तक खरीदार के पास एक ही सहारा था: दुकानदार की जुबान।

हॉलमार्क इसी जुबान की जगह एक रिकॉर्ड रखता है। इस लेख में आप जानेंगे कि हॉलमार्क सोने का मतलब क्या है, 916 हॉलमार्क का अर्थ क्या होता है, भारत में BIS हॉलमार्किंग क्यों जरूरी की गई, हॉलमार्क किस चीज की गारंटी देता है और किसकी नहीं, और खरीदने से पहले आप खुद इसे कैसे जांच सकते हैं।

हॉलमार्क सोना क्या है?

हॉलमार्क सोना वह सोने का गहना है जिसकी शुद्धता भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांची गई हो और जांच का नतीजा गहने पर हमेशा के लिए अंकित कर दिया गया हो।

इस परिभाषा में तीन बातें खास हैं:

  • जांच तीसरे पक्ष ने की है। ज्वेलर अपने सोने को खुद ग्रेड नहीं देता। यह काम BIS से मान्यता प्राप्त असेइंग और हॉलमार्किंग सेंटर (AHC) करता है।

  • नतीजा गहने पर लिखा है। निशान लेजर से उकेरे जाते हैं, इसलिए शुद्धता का दावा गहने के साथ ही चलता है।

  • दावे की जांच हो सकती है। हर गहने पर एक अलग कोड होता है जो सरकारी डेटाबेस से जुड़ा रहता है।

यानी अगर कोई पूछे कि "हॉलमार्क सोने का मतलब क्या है", तो सबसे सटीक जवाब यह है: उस खास गहने के सोने की मात्रा एक स्वतंत्र केंद्र ने मापी, भारतीय मानक IS 1417 के हिसाब से उसका ग्रेड तय किया और नतीजा उसी गहने पर छाप दिया।

एक आम गलतफहमी यहीं दूर कर लें। हॉलमार्क का मतलब "100 प्रतिशत शुद्ध सोना" नहीं है। हॉलमार्क शुद्धता का ग्रेड बताता है, जो 14, 18, 20, 22, 23 या 24 कैरेट हो सकता है। हॉलमार्क वाली 18 कैरेट की अंगूठी उतनी ही असली है जितना हॉलमार्क वाला 24 कैरेट का सिक्का। बस दोनों की शुद्धता का स्तर अलग-अलग प्रमाणित है।

"हॉलमार्क" शब्द आया कहां से?

यह शब्द अपने मतलब में ही छिपा है: Hall यानी हॉल और Mark यानी निशान। लंदन में सोने-चांदी की चीजें गोल्डस्मिथ्स हॉल में जांच के लिए भेजी जाती थीं और जो चीज खरी उतरती थी उस पर हॉल की मुहर लगती थी। यही "हॉल की मार्क" आगे चलकर हॉलमार्क बनी। यह व्यवस्था सन 1300 के एक कानून से चली आ रही है, यानी उपभोक्ता सुरक्षा की सबसे पुरानी व्यवस्थाओं में से एक।

भारत ने यही विचार अपनाया, पर जांच का अधिकार किसी व्यापारी संघ के हाथ से लेकर सरकार को दे दिया। अब मानक BIS तय करता है, जांच केंद्रों को लाइसेंस वही देता है और डेटाबेस भी उसी के पास रहता है।

916 हॉलमार्क सोने का मतलब

भारत में ज्यादातर खरीदारों का पहला सामना इसी अंक से होता है, इसलिए इसे ठीक से समझ लेना चाहिए। "916 हॉलमार्क सोने का मतलब" और "हॉलमार्क 916 गोल्ड मीनिंग" दोनों एक ही बात पूछते हैं।

916 एक अनुपात है, प्रति हजार हिस्से। मिश्रधातु के हर 1000 हिस्सों में 916 हिस्से शुद्ध सोना हैं, यानी 91.6 प्रतिशत। यह 22 कैरेट सोना है, क्योंकि 22 को 24 से भाग देने पर करीब 0.9167 आता है। 916 उसी संख्या का पूर्णांकित रूप है, और इसीलिए BIS इसे 22K916 लिखता है।

बाकी 8.4 प्रतिशत में चांदी, तांबा और थोड़ा जस्ता होता है। यह मिलावट नहीं, जरूरत है। शुद्ध सोना इतना नरम होता है कि उसमें नग जड़ना या कंगन को सालों पहनना मुश्किल है। इसलिए ज्वेलर उसे मिश्रधातु बनाते हैं। मिश्रण का असर रंग पर भी पड़ता है: तांबा ज्यादा हो तो गहने में लालिमा आती है, चांदी ज्यादा हो तो रंग हल्का दिखता है।

अब सवाल यह उठता है कि 24 कैरेट के गहने आमतौर पर क्यों नहीं मिलते। जवाब वही है: 24 कैरेट (999) सोना सिक्कों और बिस्कुट के लिए ठीक है, पर गहने में ढालने पर वह मुड़ जाता है, घिस जाता है और नग को पकड़ नहीं पाता।

हॉलमार्क 916 गोल्ड मीनिंग: दूसरे अंकों का क्या अर्थ है

गहनों पर आपको 916 के अलावा ये अंक भी मिल सकते हैं:

  • 999: 24 कैरेट, सिक्के और बिस्कुट में

  • 958: 23 कैरेट

  • 916: 22 कैरेट, पारंपरिक गहनों का मानक

  • 833: 20 कैरेट

  • 750: 18 कैरेट, डायमंड जड़े और हल्के गहनों में आम

  • 585: 14 कैरेट, रोजमर्रा के आधुनिक डिजाइन में आम

इन अंकों का पहनने, दोबारा बेचने और कीमत पर क्या असर पड़ता है, यह विस्तार से हॉलमार्क शुद्धता अंक: 916, 750, 833 और 999 का असली मतलब वाले लेख में बताया गया है।

एक जाल से सावधान रहें। ज्वेलर के हाथ से ठोका गया सिर्फ "916" हॉलमार्क नहीं होता, वह एक दावा होता है। असली हॉलमार्क में BIS का त्रिकोण और HUID कोड साथ होने चाहिए। अगर गहने पर सिर्फ अंक है और BIS का लोगो नहीं, तो वह गहना BIS की व्यवस्था से गुजरा ही नहीं, चाहे ठप्पा कुछ भी कहे।

KDM सोना क्या होता है?

पुराने घरेलू गहनों पर कई बार "KDM 916" छपा मिलता है। KDM का संबंध कैडमियम वाली टांके की सामग्री से है, जिसका इस्तेमाल पहले सुनार जोड़ लगाने में करते थे। कैडमियम हानिकारक धातु है, इसलिए इसका चलन बंद हो गया। KDM वाले गहने BIS से प्रमाणित नहीं थे। ऐसे गहने रखना या बेचना गैरकानूनी नहीं है, पर इन्हें हॉलमार्क वाले नहीं माना जाता।

भारत में BIS हॉलमार्किंग अनिवार्य क्यों की गई?

BIS ने सोने की हॉलमार्किंग का स्वैच्छिक कार्यक्रम साल 2000 से चलाया। दो दशक तक ज्यादातर ज्वेलर इसमें शामिल ही नहीं हुए और ग्राहक के पास दबाव बनाने का कोई जरिया नहीं था। 23 जून 2021 से हॉलमार्किंग अनिवार्य होना शुरू हुआ, जिले-दर-जिले। अप्रैल 2022 में दूसरे चरण में और जिले जुड़े और अप्रैल 2023 के तीसरे चरण के बाद कुल जिलों की संख्या 340 से ऊपर पहुंच गई। नियम उन्हीं जिलों पर लागू है जिन्हें सरकार ने अधिसूचित किया है, और यह सूची बढ़ती रही है।

इस बदलाव के कारण व्यावहारिक थे:

शुद्धता का फर्क आम था और दिखता नहीं था। 22 कैरेट कहकर बेचा गया गहना जांच में 20 या 21 कैरेट निकल सकता था। फर्क इसलिए मायने रखता है कि आप दाम 22 कैरेट के भाव से चुकाते हैं। 40 ग्राम के सेट में एक कैरेट की कमी का मतलब है कीमत के हिसाब से करीब 1.7 ग्राम सोना, जो एक बिल्कुल ठीक दिखने वाले बिल के भीतर छिपा रहता था।

ग्राहक सबूत नहीं, भरोसा खरीद रहे थे। पीढ़ियों तक लोग एक ही पारिवारिक सुनार से इसलिए जुड़े रहे कि दुकान बदलने में शुद्धता का जोखिम था। इससे छोटे ईमानदार ज्वेलर नए ग्राहक नहीं जोड़ पाते थे और लापरवाह दुकानदार सिर्फ नाम के सहारे चलते रहते थे।

बेचते समय तस्वीर धुंधली रहती थी। पुराना सोना बेचने या बदलवाने पर शुद्धता वही मानी जाती थी जो खरीदने वाला ज्वेलर बता दे। बिक्री के समय दर्ज प्रमाण दोनों पक्षों को एक आधार देता है।

दुनिया के सबसे बड़े सोना बाजारों में से एक में भरोसा असमान था। एक राष्ट्रीय निशान, जिसका मतलब सूरत, कोच्चि और जयपुर में एक ही हो, बाजार को खासकर पहली बार खरीदने वालों के लिए आसान बना देता है।

इसकी कानूनी नींव BIS अधिनियम 2016 और सोने के गहनों व कलाकृतियों की हॉलमार्किंग का आदेश है। इनके तहत अधिसूचित जिले का ज्वेलर BIS पंजीकरण रखे और कवर किए गए ग्रेड के सिर्फ हॉलमार्क वाले गहने बेचे। नियम तोड़ने पर दंड का प्रावधान है।

हर चीज इसमें शामिल नहीं है। छूट इन्हें मिलती है: तय वार्षिक कारोबार सीमा से नीचे के ज्वेलर, निर्यात के गहने, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी के लिए बने गहने, सरकार की मंजूरी वाले कारोबार-से-कारोबार सौदे, घड़ियां, फाउंटेन पेन, और कुंदन, पोल्की व जड़ाऊ जैसी विशेष श्रेणियां। इसलिए पोल्की का दुल्हन सेट अगर बिना हॉलमार्क के मिले तो जरूरी नहीं कि गड़बड़ हो।

हॉलमार्क क्या प्रमाणित करता है और क्या नहीं

सबसे ज्यादा उलझन यहीं होती है, इसलिए बात साफ रखनी चाहिए।

हॉलमार्क जो प्रमाणित करता है: उस गहने की सोने की शुद्धता। यानी गहने का नमूना BIS मान्यता प्राप्त केंद्र में जांचा गया, उसकी शुद्धता घोषित ग्रेड के अनुरूप निकली और नतीजा एक अनोखे कोड के साथ दर्ज हुआ।

हॉलमार्क जो प्रमाणित नहीं करता:

  • दुकानदार को। निशान गहने पर होता है, दुकान पर नहीं। वह यह नहीं बताता कि ज्वेलर दाम, वजन या वापसी की नीति के मामले में ईमानदार है या नहीं। ज्वेलर का BIS लाइसेंस एक अलग चीज है और उसे अलग से जांचना चाहिए।

  • बिल पर लिखे वजन को। हॉलमार्क शुद्धता बताता है, ग्राम नहीं। टैग और बिल का वजन तराजू के वजन से खुद मिलाएं।

  • नग या हीरे को। हीरे या रत्न जड़े गहने में हॉलमार्क सिर्फ सोने वाले हिस्से पर लागू है। नग की गुणवत्ता और कैरेट वजन के लिए अलग ग्रेडिंग रिपोर्ट होती है।

  • मेकिंग चार्ज या दाम को। हॉलमार्क वाली अंगूठी भी महंगी हो सकती है। निशान यह बताता है कि धातु क्या है, यह नहीं कि भाव ठीक है या नहीं। उस दिन के सोने के भाव से मिलान करें और मेकिंग चार्ज अलग लिखवाएं।

  • डिजाइन या कारीगरी को। कमजोर टांका, पतले खोखले हिस्से और ढीला क्लैस्प किसी ग्रेडिंग में नहीं आते।

इसे एक वाक्य में रखना हो तो: हॉलमार्क बताता है कि "यह धातु क्या है", पर यह नहीं बताता कि "किसने, किन शर्तों पर बेची"। दूसरा सवाल अब भी आपके ध्यान की मांग करता है, पर पहले सवाल की चिंता छोड़ी जा सकती है।

एक बारीक बात और। हॉलमार्क उसी रूप में लागू है जिस रूप में गहना जांचा गया था। अगर आप बाद में चेन काटते हैं, अंगूठी का साइज बदलवाते हैं या गहना पिघलवाकर नया बनवाते हैं, तो निशान कट सकता है या अमान्य हो सकता है। बड़े बदलाव के बाद ज्वेलर से गहने की दोबारा हॉलमार्किंग करवाने को कहें।

गहने पर हॉलमार्क के निशान कैसे पढ़ें

1 अप्रैल 2023 से अधिसूचित जिले में नियम का पालन करने वाले गहने पर तीन निशान होते हैं:

  1. BIS का लोगो। एक छोटा त्रिकोण, जो बताता है कि गहना BIS की व्यवस्था से गुजरा है।

  2. शुद्धता का ग्रेड। कैरेट और अंक साथ में, जैसे 22K916 या 18K750।

  3. HUID। हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन, छह अक्षरों का कोड जिसमें अंक और अक्षर मिले होते हैं।

तीनों में HUID सबसे अहम है, क्योंकि दो गहनों पर एक HUID नहीं होता। इसे एक सीरियल नंबर समझिए जो एक गहने, एक ज्वेलर और एक जांच से जुड़ा है। पुरानी व्यवस्था में जांच केंद्र का निशान, ज्वेलर की पहचान और वर्ष का कोड अलग-अलग छपते थे। नई व्यवस्था में इन सबकी जानकारी HUID से ही निकल आती है, इसलिए वे निशान हटा दिए गए।

जिन पुराने हॉलमार्क वाले गहनों पर तीन की जगह चार या पांच निशान हैं, वे आज भी मान्य हैं। उन्हें नए नियम के कारण दोबारा हॉलमार्क कराने की जरूरत नहीं है।

निशान बहुत छोटे होते हैं। ज्वेलर से लूप मांगें या फोन के कैमरे का मैक्रो मोड इस्तेमाल करें और साफ लेजर से उकेरा त्रिकोण और छह अक्षरों का साफ कोड देखें। धुंधला, हाथ से ठोका हुआ या अजीब ढंग से गहरा ठप्पा दूसरी नज़र का हकदार है।

हॉलमार्किंग की प्रक्रिया: गहने तक निशान कैसे पहुंचता है

यह सफर जान लें तो समझ आता है कि निशान की इतनी कीमत क्यों है।

ज्वेलर गहनों का एक बैच तैयार करके उसे BIS पोर्टल पर दर्ज करता है। बैच असेइंग और हॉलमार्किंग सेंटर पहुंचता है, जहां गहनों से एक छोटा नमूना लेकर जांचा जाता है। शुरुआती जांच आमतौर पर X-ray फ्लोरेसेंस (XRF) से होती है, और नतीजे की पुष्टि जरूरी हो तो फायर असे को संदर्भ विधि माना जाता है। अगर शुद्धता ज्वेलर के बताए ग्रेड के बराबर निकले, तो केंद्र हर गहने पर लेजर से BIS लोगो, ग्रेड और HUID उकेर देता है। गहने की जानकारी HUID के साथ BIS के डेटाबेस में चढ़ा दी जाती है।

अगर गहना जांच में खरा न उतरे, तो उस पर निशान नहीं लगता। ज्वेलर या तो उसे सही शुद्धता तक दोबारा बनाता है या उस घटे हुए ग्रेड के नाम से बेचता है जो वह असल में है।

हर गहना अलग से जांचा और अलग से दर्ज होता है, इसलिए एक निशान का पूरा सिलसिला बनता है। उसी सिलसिले की वजह से खरीदार या BIS किसी भी गहने को उसी ज्वेलर तक वापस खोज सकता है जिसने उसे जांच के लिए भेजा था।

हॉलमार्क से खरीदार को क्या सुरक्षा मिलती है

व्यवस्था समझ आने के बाद फायदे सीधे गिनाए जा सकते हैं:

  • शुद्धता जांची जा सकती है। दावे पर भरोसा करने की जगह आप HUID खुद चेक कर सकते हैं।

  • शिकायत का आधार मिलता है। अगर हॉलमार्क वाला गहना बाद में लिखे ग्रेड से कम निकले, तो आपके पास ऐसा कोड है जो ज्वेलर और जांच के रिकॉर्ड तक पहुंचाता है। यह सिर्फ हाथ से लिखे बिल से कहीं मजबूत शुरुआत है।

  • दोबारा बेचना साफ रहता है। दर्ज ग्रेड वाला गहना बदलने या बेचने के समय बहस की गुंजाइश घटाता है, हालांकि खरीदने वाला ज्वेलर तब भी जांच करेगा और घिसाई-गलाई की कटौती काटेगा।

  • तुलना ईमानदार होती है। दो ज्वेलर दोनों 22K916 बोलें, तो आप मेकिंग चार्ज की तुलना कर सकते हैं, यह सोचे बिना कि धातु ही अलग तो नहीं।

  • छोटी दुकानें भी मुकाबले में आती हैं। कम जाना-माना ज्वेलर भी वही सरकारी निशान दिखा सकता है जो बड़ी राष्ट्रीय चेन दिखाती है।

बिल का ध्यान भी रखें। उसमें सोने का वजन, शुद्धता का ग्रेड, लगाया गया भाव, मेकिंग चार्ज और हॉलमार्किंग शुल्क अलग-अलग पंक्तियों में होने चाहिए। सोने पर 3 प्रतिशत और मेकिंग चार्ज पर 5 प्रतिशत GST लगता है। जिस बिल में सब कुछ एक रकम में मिला दिया जाता है, उसमें यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि हॉलमार्किंग सचमुच हुई और उसका पैसा सही लिया गया या नहीं।

HUID कैसे चेक करें: पैसे देने से पहले की जांच

BIS का आधिकारिक मोबाइल ऐप BIS Care है। उसमें "Verify HUID" का विकल्प है। गहने पर छपा छह अक्षरों का कोड डालें और ऐप उससे जुड़ी जानकारी दिखाएगा: गहने का प्रकार, शुद्धता, ज्वेलर और जांच केंद्र।

नतीजा आने पर दो बातें मिलाएं। पहली, गहने का प्रकार और शुद्धता वही हो जो आपके हाथ में है। दूसरी, ज्वेलर का नाम वही हो जिससे आप खरीद रहे हैं। इनमें से कुछ भी न मिले, तो यह सबसे साफ संकेत है कि गड़बड़ है, जैसे किसी दूसरे गहने का कोड नकल करके छाप दिया गया हो।

उसी ऐप से आप यह भी देख सकते हैं कि ज्वेलर के पास वैध BIS पंजीकरण है या नहीं। यह वही सवाल है जिसका जवाब हॉलमार्क खुद नहीं देता।

BIS प्रमाणित ज्वेलर कहां मिलेगा

हॉलमार्क पढ़ना आना आधा काम है। बाकी आधा यह है कि आप ऐसे ज्वेलरों की सूची से शुरुआत करें जो पहले से BIS व्यवस्था में काम करते हैं। GoldJewellers.in पर पूरे भारत के सत्यापित ज्वेलर सूचीबद्ध हैं और आप अपने शहर के हिसाब से खोज सकते हैं या गोल्ड ज्वेलरी श्रेणी में देख सकते हैं।

अगर आप शादी के गहने देख रहे हैं, तो ब्राइडल ज्वेलरी श्रेणी और भारत के प्रसिद्ध सोना बाजारों की गाइड अगला पड़ाव हो सकते हैं। दुकान में कदम रखने से पहले भाव का अंदाजा चाहिए, तो पढ़ें भारत में सोने के दाम क्यों बढ़ते-घटते हैं। हॉलमार्किंग से जुड़े नियमों की ताजा खबरें न्यूज़ सेक्शन में मिलती रहेंगी।

अपने पास BIS प्रमाणित ज्वेलर्स खोजें

Written by

B

Bhargav

Bhargav is a writer at Gold Jewellers with over 7 years of experience working with a jewellery brand. His industry experience gives him practical insights into Indian jewellery markets, customer preferences, and the challenges faced by jewellers. Working alongside a team of industry experts, he creates research-driven content on jewellery trends, wholesale sourcing, gold and diamond jewellery, and business developments to help readers make informed decisions.

Questions

Frequently Asked

हॉलमार्क सोना क्या है, आसान भाषा में?

यह वह सोने का गहना है जिसे BIS से लाइसेंस प्राप्त केंद्र ने जांचा है और जिस पर शुद्धता का ग्रेड और छह अक्षरों का अनोखा कोड स्थायी रूप से अंकित है। यह निशान बताता है कि सोने की जांच विक्रेता ने नहीं, एक स्वतंत्र प्रयोगशाला ने की है।

क्या हॉलमार्क सोने का मतलब 100 प्रतिशत शुद्ध सोना है?

नहीं। हॉलमार्क शुद्धता का ग्रेड बताता है, जो 14, 18, 20, 22, 23 या 24 कैरेट हो सकता है। सिर्फ 24 कैरेट (999) लगभग शुद्ध होता है। ज्यादातर गहने 22 या 18 कैरेट के होते हैं क्योंकि शुद्ध सोना रोज पहनने के लिए बहुत नरम है।

916 हॉलमार्क सोने का मतलब क्या होता है?

इसका मतलब है कि 1000 हिस्सों में 916 हिस्से शुद्ध सोना हैं, यानी 91.6 प्रतिशत या 22 कैरेट। बाकी में आमतौर पर चांदी, तांबा और जस्ता होते हैं। BIS के निशान में इसे 22K916 लिखा जाता है।

916 और 22 कैरेट में क्या अंतर है?

कोई अंतर नहीं। 22 कैरेट सोने को ही शुद्धता के हजारवें हिस्से में लिखें तो 916 आता है। दोनों एक ही चीज के दो नाम हैं।

क्या हर सोना खरीद पर हॉलमार्क जरूरी है?

अधिसूचित जिलों के ज्वेलर के लिए कवर किए गए ग्रेड पर जरूरी है। निर्यात के गहने, घड़ियां और कुंदन, पोल्की व जड़ाऊ जैसी श्रेणियों को छूट है। अधिसूचित जिले के बाहर भी ज्वेलर स्वेच्छा से हॉलमार्क कर सकता है और आप उसे मांग सकते हैं।

क्या बिना हॉलमार्क वाला पुराना सोना बेच सकते हैं?

हां। पुराने बिना हॉलमार्क वाले गहने रखना और बेचना गैरकानूनी नहीं है। खरीदने वाला ज्वेलर उसकी शुद्धता जांचेगा और जो नतीजा आएगा उसी के हिसाब से दाम देगा। हां, नए गहने बेचने वाले ज्वेलर को अधिसूचित जिले में हॉलमार्क वाले गहने ही बेचने होते हैं।

क्या हॉलमार्क इस बात की गारंटी है कि ज्वेलर भरोसेमंद है?

नहीं। हॉलमार्क गहने की शुद्धता प्रमाणित करता है, दुकान की ईमानदारी नहीं। दुकान को परखने के लिए उसका BIS पंजीकरण अलग से जांचें, पक्का बिल मांगें और स्वतंत्र समीक्षाएं देखें।

HUID कैसे चेक करें?

BIS Care ऐप खोलें, HUID सत्यापन का विकल्प चुनें और गहने पर उकेरा छह अक्षरों का कोड डालें। ऐप जो गहने का प्रकार, शुद्धता और ज्वेलर दिखाए, उसे अपने हाथ के गहने और दुकान से मिलाएं।

क्या हॉलमार्किंग के लिए अलग पैसे लगते हैं?

हां, जांच और निशान लगाने के लिए प्रति गहना एक छोटा शुल्क लिया जाता है। यह आपके बिल पर अलग पंक्ति में दिखना चाहिए। गहने की कुल कीमत के मुकाबले यह रकम बहुत छोटी होती है।

हॉलमार्क वाला गहना कट जाए या साइज बदलवाऊं तो क्या होगा?

काटने या दोबारा ढालने पर निशान हट सकता है या अमान्य हो सकता है। बड़े बदलाव के बाद ज्वेलर से दोबारा हॉलमार्किंग करवाने को कहें।